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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Children Stories Others

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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Children Stories Others

मेला

मेला

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मेला

जब-जब

आता है

बच्चों का

दिल

खिल

उठता है

मन

बाग-बाग

हो जाता हैं

दुर्गापूजा हो

या दशहरा

हो छट पूजा

या फिर होली

और दिवाली

मेले का

इंतजार

है रहता

चरखी

झूलों पर

करते हैं

मस्ती

कितना

अच्छा

लगता है

मानो

यह पल

भाग रहा हो

यह पल

कभी भी

जाएं ना

यह पल

रुक

जाए ना

अच्छा

लगता है

आइस क्रीम

बादाम

गुब्बारा

गाड़ी

ढेरो सामान

खरीदते हैं

खुश होकर

घर को आते हैं.



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