STORYMIRROR

Divya Gehlod

Others

2  

Divya Gehlod

Others

मैं

मैं

1 min
166

जब हक़ीकत छेड़ जाती,

मुस्कुराता ख्वाब था |

भावनाओं का उमड़ता,

प्रति पल सैलाब था


भाव जो अश्कों के

संग में बह गए,

सो बह गए,

जो रह गए वो लिख रही हूँ 

मैं वो नहीं जो दिख रही हूँ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Divya Gehlod