FEW HOURS LEFT! Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
FEW HOURS LEFT! Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Preeti Singh

Others


5.0  

Preeti Singh

Others


मैं माँगता हूँ

मैं माँगता हूँ

1 min 535 1 min 535

वो बुलन्द मुकाम वो खुला आसमान मैं मांगता हूँ 

वो सूरज की किरण वो चाँद की चाँदनी मैं माँगता हूँ ,

वो ऊचाँइयों की सरहदें वो समन्दर की लहरें मैं माँगता हूँ ,

वो क़ामयाबी की सेज वो जगमगाहट का तेज़ मैं माँगता हूँ ,

वो हुनर का ताज़ वो जीत का आगाज़ 

वो उज्याली की शुरुआत वो अंधेरे का अंत मै मांगता हूँ ,

वो खेतों की सरसराहट वो फूलों की खिलखिलाहट मैं माँगता हूँ ,

मैं माँगता हूँ कुछ बचपन के पल 

जिनमें माँ का प्यार और बाप का दुलार मैं माँगता हूँ 

वो बिफिक्रे उड़ान वो बेलगाम ज़िन्दगी मैं वापस चाहता हूँ ,

मैं तेरी वही इंसानियत तुझमें ज़िन्दा देखना चाहता हूँ ,

तेरे लोभ तेरे लालच का अंत मैं मांगता हूँ ,

डर मत नासमझ मैं तो बस चंद लम्हें आज़ादी के 

चंद पल तेरी मेहमान नवाज़ी के मांगता हूँ। 


Rate this content
Log in