Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Manpreet Kaur

Others


2  

Manpreet Kaur

Others


माँ

माँ

1 min 391 1 min 391

सो रही थी मैं कि रात को

उनका सपना आ गया

सपना भी ऐसा के धड़कन

बढ़ा गया

वह पास मेरे आई और मेरे

को समझाया था


आज ख़ुदा ने मुझे सपने में

जन्नत से मिलाया था

उठी तो देखा आँखें नम

हो रही थी

पता नहीं क्यों लेकिन मैं

सच में रो रही थी


उन दो पलों ने मेरे में अलग

सा एहसास जगाया था

नाज है मुझे ऐसे सपने पर

जिसने मुझे मेरी माँ से

मिलवाया था

मुझे मेरी माँ से मिलवाया था


Rate this content
Log in

More hindi poem from Manpreet Kaur