माँ
माँ
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एक लफ्ज्, एक एहसास,
एक उम्मीद, एक भरोसा,
जो हर तकलीफ़ को
खुशी में बदल दे
जो हर परेशानी का
पलक झपकते हल कर दे
जो हजारों गलतियों के बाद भी
आपका साथ दे
माँ
बहुत याद आती है जब कोई
समझने वाला नहीं होता
जब कोई मेरी बातें सुनने
वाला नहीं होता
बहुत याद आती है माँ
जब रोती हूं पर चुप कराने
वाला कोई नहीं होता
जब ख्याल रखने वाले तो होते हैं
पर परवाह कोई नहीं करता
एक अरसा हो गया है तुझे देखे हुए
तुझे गले लग खुलकर रोए हुए
तेरी गोद में बेफिक्र होकर
सोए हुए
माँ बहुत याद आती है II
