STORYMIRROR

Jaya Kumari

Others

3  

Jaya Kumari

Others

बचपन

बचपन

1 min
326

मैं तेरी ओर देखूं ,मुझे मेरा बचपन दिखे,

वो खट्टी मीठी यादों का एक बड़ा सा समंदर दिखे,

याद आते हैं वह सारे पल वो हर छोटी बात पर झगड़ना

वो साथ मिलकर हंसना रोना,

वक्त बदला और बचपन ने अलविदा कह दिया।

जिंदगी की इस दौड़ में जैसे कुछ पीछे रह गया

आज फिर उन्हीं लम्हों को जीना चाहती हूं,

तेरे संग कुछ खट्टी मीठी यादें बनाना चाहती हूं,

वो मजाक वो मस्ती ,वो बीता हुआ कल

वो बचपन एक बार फिर दोहराना चाहती हूं II


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Jaya Kumari

माँ

माँ

1 min पढ़ें

बचपन

बचपन

1 min पढ़ें