STORYMIRROR

Nishtha Grover

Others

2  

Nishtha Grover

Others

खुश..!!!

खुश..!!!

1 min
139

देखो कैसे वो अपने आप से खुश है,

बेच कर अपना ही घरबार वो खुश है।


हमें एक छत का प्यार मिल जाए,

वो कमरे की एक दीवार से खुश है।


अपनो का हाथ थामने में इतनी हिचक थी,

वो दो- चार अजनबियों के साथ से खुश है।


मां बाप भी इतने पराए हो गए,

वो अपने सौतेले व्यहार से खुश है।


आज हर किसी की नज़रों से वो गिर गई,

समझ के इसी को संसार वो खुश है।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Nishtha Grover