खुश..!!!
खुश..!!!
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देखो कैसे वो अपने आप से खुश है,
बेच कर अपना ही घरबार वो खुश है।
हमें एक छत का प्यार मिल जाए,
वो कमरे की एक दीवार से खुश है।
अपनो का हाथ थामने में इतनी हिचक थी,
वो दो- चार अजनबियों के साथ से खुश है।
मां बाप भी इतने पराए हो गए,
वो अपने सौतेले व्यहार से खुश है।
आज हर किसी की नज़रों से वो गिर गई,
समझ के इसी को संसार वो खुश है।
