खुद से मुलाकात।
खुद से मुलाकात।
1 min
574
आज अरसों बाद ख़ुद से मुलाकात हुई।
वक़्त हालात काफी बदल चुके थे,
बदले हुए तो हम भी थे।
खुद को जब पूछा कि इतनी नाराज़गी
ख़ुद से क्यों लिए बैठे हो,
शिकायतें दूसरों की पूरी करते करते
खुद से ही तो रूठे हो।
ज़िन्दगी हसीन है, इसे हसीन ही रहने दो।
ग़म के इस सागर से कुछ खुशी के
आँसू भी बेहने दो।
