काश मिल जाये वो फुरसत के पल!!
काश मिल जाये वो फुरसत के पल!!
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वो बचपन की शरारतें और वो हसीन वक्त..
ना जाने किस मोड़ पे ले आई ये जिंदगी कमबख़्त!!
वो दोस्तों की यारी ना कोई जिम्मेदारी
ना किसी बात की समझ फिर भी दुनिया भर की होशियारी!!
ना था टेकनॉलॉजि का जाल.. ना कोई वक्त का ख्याल..
बिना किसी मुश्किलों से गुजरता था हर साल!!
जेब थी खाली.. ना थी पहले आने की कोई होड़..
हँसी की खिलखिलाहट का नहीं था कोई तोड़ !!
वो पाँच मिनट का बहाना, वो शोर करके चीजें मनवाना..
वो रात की आराम की निंद.. वो सुबह का नया फसाना!!
सब कुछ हो के भी अब जिंदगी है खाली..
कहा ढूँढे अब वो बेखौफ खुशहाली!!
कोई तो लौटा दे वो बीता हुआ कल..
काश मिल जाये वो फुरसत के पल!!
