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devanshu tripathi

Others

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जिंदगी

जिंदगी

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जिंदगी आज तेरा हिसाब करता हूं।

यह मत पूछ कि अब तक क्यों नहीं किया।

सच तो यह है कि तेरा लिहाज करता है 

ऐ जिंदगी आज तेरा हिसाब करता हूं।।


संभलता भी तो कैसे 

तू तो गिराने में मशगूल थी

तोड़ दूंगा सारे रिश्ते तुझसे,

यह फैसला मैं आज करता हूं।

ऐ जिंदगी आज तेरा हिसाब करता हूं।।


कसर कोई छोड़ी नहीं मैंने रातों को दिन बनाने की।

टूटे-फूटे अलग-थलग रास्तों से मंजिल बनाने की।

मगर आज फिर शुरू से शुरू करने की कवायद है।

मैं फिर हार गया, तेरे नाम जीत के खिताब करता हूं।

ऐ जिंदगी आज तेरा हिसाब करता हूं।।


और किया ही था क्या मैंने, बस किताबें ही तो पढी थी।

सुना था अच्छी दोस्त होती है,

पर जब हर तरफ अंधेरा और तन्हाई है तो रिश्ते और दोस्त नहीं होते,

ना रहूं किसी गलतफहमी में, सो आग के हवाले हर किताब करता हू। 

ऐ जिंदगी आज तेरा हिसाब करता हूं।।


वादा रहा फिर मिलेंगे जरूर फिर जिएंगे भरपूर।

ख्वाहिशें भी होंगी जब फरमाइशें भी होंगी।

खुद्दारी होगी, रास्ते होंगे और सब मंजिलें भी हमारी होगी।

बस उस दिन का इंतजार में हो के बेताब करता हूं।

ऐ जिंदगी आज तेरा हिसाब करता हूं।।



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