STORYMIRROR

Umme Salma

Others

4  

Umme Salma

Others

हज़ारों ख्वाहिशें

हज़ारों ख्वाहिशें

1 min
386


जिस राहों को चुना ना गया उस रास्ते पर आज ये क़दम निकले

कहते हैं जिसकी कोई मंज़िल नहीं उसी सफ़र पे हम निकले।

तलाश-ए-गंज की खातिर छोड़ के हम अपने हरम निकले

पाना है हर हाल में उसे, ख़ाके हम ये कसम निकले।

फ़ौलाद बनाके जिगर, सी कर अपने जख्म निकले

निहत्ते नहीं साहेब साथ अपने लिए सच्चाई की कलम निकले।

जब इब्तिदा हुआ सफ़र दूर दिल के सारे भरम निकले

जब हुआ ख़तम लेके इश्क़-ए-इलाही इस दुनिया से वहम निकले।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन