एक अरसे से एक आस में
एक अरसे से एक आस में
1 min
159
एक अरसे से
एक आस में
घुटती किसी
भड़ास में
जैसे इरादतन
एक काश मैं
मिटती, मिलती
यों ही किसी तलाश में
जैसे अंधेरा
हो प्रकाश में
और
जीती बाजी
हारी जैसे ताश में
ओस की बूदें
छिपी हो जैसे घास में
खुद मुझसे दूर
तुमसे हूं मैं पास में
एक अरसे से
एक आस में।
