एक अरसे से एक आस में
एक अरसे से एक आस में
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एक अरसे से
एक आस में,
घुटती किसी
भड़ास में,
जैसे इरादतन
एक काश मैं,
मिटती, मिलती
योंही किसी तलाश में,
जैसे अंधेरा
हो प्रकाश में,
और
जीती बाजी
हारी जैसे ताश में,
ओस की बूदें
छिपी हो जैसे घास में,
खुद मुझसे दूर
तुमसे हूं मैं पास में,
एक अरसे से
एक आस में।
