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Anshuman Singh

Others

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Anshuman Singh

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बूँदें बादलों का खत होती हैं

बूँदें बादलों का खत होती हैं

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बादलों से इश्क़

तुमसे पहले हुआ

जब वो बरस रहे थे

मैं बालकनी में थी

फोन पर तुमसे बात करते

तब हम सिर्फ दोस्त थे

बारिश की बूँदें

बादलों का खत होती हैं

जिसे पढ़ते ही

बादलों से प्रेम कर बैठी

तुमसे पहले


अक्सर सोचती हूँ

काश तुम बादल होते

और मैं बारिश की बूँदें

हम मिलकर खुशियाँ बाँटते

आसमान से गुफ्तगू करते

पक्षियों की कलाबाजियां देखते

फिर जब मैं तुमसे दूर जाती

तुम समुन्दर से छीन लाते मुझे

अफ़सोस तुम तुम थे

बादल नही बन पाए

और मुझे बादलों से इश्क

तुमसे पहले हुआ

तुमसे पहले


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