बचपन
बचपन
बचपन की तो बात निराली l
खेल कूद से फुरसत न पाई ll
मां का आंचल लागे प्यारा l
सबसे मीठा सबसे निराला ll
नादान भोली सी सुरत पाई l
सब ने है चाकलेट खिलाई ll
रोटी से पहले पिता की डांट खाई l
जब से बीच मे ही छोड़ दी पढ़ाई ll
बहनों का लाडला मैं भाई l
प्यार से राखी मैने बंधाई ll
छोटे भाई से हुईं हाथापाई l
मां ने उठक बैठक लगाई ll
जैसे ही दोस्त ने पुकारा l
मानो दिल को चैन आया ll
नाचते गाते दिन हैं बीतते l
हररोज नया कुछ सीखते ll
खेलने जाना अच्छा लगता l
पढाई से छुटकारा मिलता ll
न कोई फिक्र न कोई परेशानी l
बस हल्ला गुल्ला और मस्ती ll
पूरा दिन सायकिल चलाना l
पूरे गाँव में घूमना फिरना ll
गली गली में शोर मचाना l
और तालाब में खूब नहाना ll
नाचना कूदना एक ही काम l
दिल मे रटते राम राम राम ll
कभी गिली डण्डा खेलते l
कभी छुपा छूपपी खेलते ll
मासूमियत भरी मस्ती थी l
खुशियाँ एकदम सस्ती थी ll
कहानियों से दिल बहकता l
परी कथा से दिल मचलता ll
अनोखा सा था वो संसार l
दिल से निकलती रसधार ll
मुशिकल कभी न आई l
ममता की छांव है पाई ll
सपनों की बहती है कश्ती l
जीवन मे हरपल थी मस्ती ll
