STORYMIRROR

Sanjit kimar

Others

2  

Sanjit kimar

Others

अपनापन

अपनापन

1 min
387

खुदा जानता है तेरे गुनाहों को

कर ले कबुल इनसे क्या शरमाना


जब शोर है शहर में

तो घर में क्या घबराना


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sanjit kimar