अनफोरगेटबल मेमोरीज़
अनफोरगेटबल मेमोरीज़
1 min
209
तुम्हारी बहुत याद आती है
उन लम्हों को याद कर
आँखें नम होजाती है
वो दिन भी बड़े सुहाने थे
जब हम बाते किया करते थे
अब तो जैसे सब बदल सा गया
जो अपना था वो पराया हो गया
वो साथ की गई मस्तियाँ
और क्लास में ली गई सुस्तीयाँ
बात ना मान ने पर दी गई गालियाँ
साथ मिलकर सुलझाई गई
परेशानियाँ
वो रूठना, वो मनाना
वो चिल्लाना, वो बाहर जाना
एक दूसरे को छेड़ना
छोड़ कर जाने के लिए कहना
वो समझाना, वो सताना
वो गाने भेजना, वो मस्ती करना
सब याद आता है
और हर दिन की तरह यह सपना
सपना ही रह जाता है।
