अब हैं virtual दुनिया का ज़माना
अब हैं virtual दुनिया का ज़माना
कोई नहीं आता, अब सुबह उठाने ,
न कोई आता, शाम खेलने बुलाने ,
अब सब कुछ होता मोबाइल पर ,
क्योंकि अब है वरचुअल दुनिया का ज़माना।
अब न कोई दादी - नानी की कहानी ,
अब न गर्मी की छुट्टी में कहीं आना - जाना ,
अब मोबाइल पर ही सारे रिश्ते है निभाना ,
क्योंकि अब है वरचुअल दुनिया का ज़माना।
अब न पेड़ों पर घोसलें ,न चिड़ियों का चहचहाना ,
न पत्तों पर बारिश का पानी , न बच्चों की कागज़ की कश्ती ,
अब मोबाइल पर ही प्रकृति सारी,
क्योंकि अब है वरचुअल दुनिया का ज़माना।
खुद ही रोना , खुद ही मनाना ,
न कहीं आना , न कहीं जाना,
अब सब कुछ आता मोबाइल पर ,
क्योंकि अब है वरचुअल दुनिया का ज़माना।
बना था रिश्ते जोड़ने के लिए ,
पर अब बन गया सब कुछ तोड़ने के लिए ,
अब मोबाइल पर ही सिमट कर रहा गई दुनिया ,
क्योंकि अब है वरचुअल दुनिया का ज़माना।
