भावों में बहती हूँ फिर शब्दों को रचती हूँ , हां मैं कविता लिखती हूँ।
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अनीता मिश्रा सिद्धि। हजारी बाग झारखण्ड ************** बरगद के छाँव जैसा तेरा प्यार ,हमे हर मोड़ पर सहारा देता है । आप हैं तो पापा सबकुछ है। मेरे जीवन के बरगद के छाँव आप ही हैं।
अनीता मिश्रा सिद्धि । हजारी बाग झारखण्ड । पति का बटुआ मेरे लिए स्वर्ग का खजाना , जब मुझे मिलता है तो ,सच में कितनी ख़ुशी होती है उसमे से पैसे चुराकर । शब्दों में बयान नहीं कर सकती।
अनीता मिश्रा सिद्धि हजारीबाग । झारखण्ड । 12/10/2019 मंगलवार आओ तुम्हें मैं छुपा लूँ , सारी दुनियाँ से । तुम्हें जानती हूँ किसी से भी तुम खराब बर्ताव नहीं करते। तुम्हारीं आत्मा की आवाज बस सोलमेट यही कहती है। प्यार से ही दुनियाँ को बदला जा सकता है।
जीत ही लेंगे अपनी हुनर से ये जमाने वालों,हमने सिखें हैं रिश्तों और जज्बातों के निभाने का रिवाज , आप जिसे लोकव्यवहार कहते हो। बोलो नेग में आप क्या दोगे हमें। अनीता मिश्रा "सिद्धि" हजारी बाग झारखण्ड । रविवार 10 /11/2019
गिरती ,सँभलती , लहराती रहती हूँ, मेरे भावों के लहरों पर कितने दुःख के थपेड़े पड़े है। " तुम क्या समझोगे एक नदी की आत्म-कथा"। अनीता मिश्रा सिद्धि । हजारीबाग झारखण्ड शुक्रवार
हार मानी नहीं कितनी भी कठिन राह हो, जीत लेंगे हर वो चीज जो मन में ठानी है, गम का सवेरा छंट जाएगा । नयी सुबह पुकार रही बिती रात कमल दल फूले। अनीता मिश्रा "सिद्धि" हजारी बाग । झारखण्ड
दोस्त हो बस नाम के झाँका कभी दिल में मेरे, मुझे क्या चाहिए । तन्हा रही मैं और तुम भी चाहती हूँ बहुत सारी हसरतें पूरी कँरु , तुम्हारे साथ आओ ना मेरे साथ सभी मिलकर एक से ग्यारह बनतें हैं । मचाते हैं धमाल जिन्दगी के सफ़र में। अनीता मिश्रा "सिद्धि"
बहुत कुछ तुमसे माँ कहना था , दूर हूँ मन की बात किसे सुनाऊँ । अपनी विरह व्यथा किसे दिखाऊँ । लिख डाला सारे दर्द को खत में मगर आज तक भेज ना सकी । हाँ माँ लिखा जो खत मगर भेजा नहीँ। अनीता मिश्रा "सिद्धि" सोमवार 4/11/2019 हजारी बाग झारखण्ड।