वही लिखता हूँ जो दिल में आता है |
अब चाहे तो आ छत पर जब आए घर, अब उस गली वाला मकान छोड़ दिया मैंने। अब चाहे तो आ छत पर जब आए घर, अब उस गली वाला मकान छोड़ दिया मैंने।
अक्सर तन्हा रातों में जब नींद नहीं मुझको आती अक्सर तन्हा रातों में जब नींद नहीं मुझको आती