Poet & Author
अकसर अदा ही बेवफाई, होती मुक़ाम-ए-इश्क़ पर अकसर अदा ही बेवफाई, होती मुक़ाम-ए-इश्क़ पर
ऐ मेरी मल्लिका-ए-हुस्न, मुझे तू उल्फ़त का जाम दे दे !! ऐ मेरी मल्लिका-ए-हुस्न, मुझे तू उल्फ़त का जाम दे दे !!
इस रिश्ते का इतना मान, खींच लाए यमलोक से प्राण इस रिश्ते का इतना मान, खींच लाए यमलोक से प्राण