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जहाँ ना होता था कोई जाति धर्म,भेद-भाव, लड़ते-झगड़ते फिर लगते खेलने भूलकर हर घाव। जहाँ ना होता था कोई जाति धर्म,भेद-भाव, लड़ते-झगड़ते फिर लगते खेलने भूलकर हर घाव...
मिट्टी का घड़ा हूँ मैं मेरे भी कुछ अरमान हैं, लोगों की प्यास बुझाना मिला मूझे ये वरदान है।! मिट्टी का घड़ा हूँ मैं मेरे भी कुछ अरमान हैं, लोगों की प्यास बुझाना मिला मूझे ...