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राजेश "बनारसी बाबू"
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मैं क्रिएटिव व्यक्तित्व का इन्सान हूं

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Submitted on 28 May, 2021 at 17:34 PM

तेरी वो बाते झूठी वो झूठी थी कसमें, दिल को तोड़ गया क्या वो झूठी रस्मे? अब तो सारी उमर आशू पीना है जिंदा लाश बनके अब जिंदगी भर रहना है अब दर्द ए जुदाई गम सारी उमर सहना है

Submitted on 28 May, 2021 at 17:01 PM

तेरी बिखरी हुई जुल्फे देख के मन बहक जाता है पास आओ जरा लव कुछ कह जाता है, तबस्सुम आईना देखता हूँ तो तू नजर आता है, कैकसा ये नज़रों की गलती थी? या कुछ गलत हो गया हमसे ? जहा देखों बस तू नजर आता है

Submitted on 28 May, 2021 at 16:56 PM

मेरा एक अतीत बुरा स्वपन सा है उसमे कोई धुआं उठा सा हैं ए मुसाफिर देख न पलट के इस चिलम ए वदन में आग लगा सा है

Submitted on 28 May, 2021 at 16:47 PM

मेरी अतीत ना जाने क्यों तड़पा जाती है जब चलो सामने पीछा करती नज़र आती है ये वक्त का तकाजा है या मेरी गम ए नसीब जिससे दूर जा रही वो करीब आ रहा

Submitted on 28 May, 2021 at 16:18 PM

यह कैसी विडंबना आई है दिल दहला देने वाली घटना आई है, बलात्कार पर बलात्कार हो रहा आज फिर डर से एक बच्ची बिलखते हुए घर आई है

Submitted on 28 May, 2021 at 16:06 PM

उसका गुस्सा होना भी जाएज है, एक पत्नी का झगड़ना और रोना भी जाएज है। मैखाने में जाम पे जाम चल रहे थे, उस पगली के बच्चो का बिलखना भी जाएज था

Submitted on 28 May, 2021 at 15:56 PM

वह बचपन बड़ा हसीन था वो चंद पल बड़ा दिल के करीब था पापा के कंधे पे बैठते थे ढेरों कहानी सुनते थे दादी अम्मा की आंचल में छुप छुप के लोरी सुना करते थे

Submitted on 28 May, 2021 at 15:49 PM

सिर्फ तुम हो दिल में कैसे तुम्हे बताऊं हाल मै अपने दिल का कैसे तुझे सुनाऊं जब तुम आती हो दिल धड़कने लगता है जाने क्यों सांसे रुक जाती है न जाने क्यों तुम से डर लगता है

Submitted on 27 May, 2021 at 10:05 AM

जीना पड़ेगा मरना पड़ेगा सरहद पे साथ साथ चलना पड़ेगा अगर रहा मैं रण में सलामत दुश्मन को मौत के घाट सोना पड़ेगा


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