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तुम्हारे जीवन की इकलौती कविता थी मैं। तुम्हारे जीवन की इकलौती कविता थी मैं।
कि अब और नहीं उलझ सकती अपने ही सवालों में.... कि अब और नहीं उलझ सकती अपने ही सवालों में....
जब वो सुबह, ओस की बूंद बंद आँखों पर ठहर जाती है जब वो सुबह, ओस की बूंद बंद आँखों पर ठहर जाती है
वार कर सारा सुकूँ, तुझ पर अपना ये रूह तो आज भी तड़पती है। वार कर सारा सुकूँ, तुझ पर अपना ये रूह तो आज भी तड़पती है।
न शौक है और न आदत है लिखना तो मेरी एक अधूरी चाहत है।। न शौक है और न आदत है लिखना तो मेरी एक अधूरी चाहत है।।
घनघोर बरस गए सारे आँसू, नवजीवन फिर लहराया। घनघोर बरस गए सारे आँसू, नवजीवन फिर लहराया।
वो तन्हा थी मगर अब फिर बिखर गई, उसकी ये कहानी भी अधूरी ही रह गई।। वो तन्हा थी मगर अब फिर बिखर गई, उसकी ये कहानी भी अधूरी ही रह गई।।
वक़्त के साथ पता न चला कि ये वक़्त पहले बदला या तुम वक़्त के साथ पता न चला कि ये वक़्त पहले बदला या तुम
ये ख़ामोशी के लम्हे, ख़ामोशी से ही गुज़र जाने दो! ये ख़ामोशी के लम्हे, ख़ामोशी से ही गुज़र जाने दो!