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सुबह का भूला

सुबह का भूला

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देर रात रंजन की आँख खुली तो उसे हैरानी हुई.माला हाथ में स्मार्टफोन थामे कुछ लिखने में व्यस्त थी.रंजन ने घड़ी की ओर देखा.२ बज चुके थे.यूँ तो माला दिन के अधिकतर समय स्मार्टफोन के साथ ही नज़र आती थी, मगर इतनी रात को माला का यह व्यवहार रंजन को खल गया.

"तुम अब तक सोई नहीं?"उसने पूछा.

"आज सुनील का जन्मदिन है.इसीलिए उसे विश कर रही थी.तुम जानते ही हो सुनील मेरे बचपन का दोस्त है.उसे मैं सबसे पहले बर्थडे विश करती हूँ.आज नहीं करूंगी तो उसे लगेगा मैं शादी के बाद बदल गई हूँ.तुम सो जाओ.मैं भी सो जाऊँगी.ज़रा वह चैट करना बंद तो करे. बाबा, एक बार चैट करने लगा तो बंद ही नहीं करता."इतना कहकर माला फिर से सुनील के साथ चैटिंग करने लगी.

"लेकिन स्मार्टफोन की लाइट आँखों में लग रही है."रंजन ने झल्लाकर कहा तो माला उठकर बैठकखाने में चली गई.

माला से रंजन को ऐसी हरकत की उम्मीद नहीं थी.अभी तीन महीने पहले वह पत्नी बन उसकी जिंदगी में आई थी.चुलबुली माला की बोलती आँखों को देखकर ही रंजन ने उसके साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर डाला था.अपनी लुभावनी हंसी से वह सबको अपना बना लेती थी.यहां तक कि रंजन के दोस्त- रिश्तेदार भी माला की तारीफ करते न थकते और उसकी बीवी को उससे ज़्यादा पसंद करते.फेसबुक में भी माला ने कईं परिचित-अपरिचितों को दोस्त बना रखा था.रंजन को उन सबसे से कोई परेशानी नहीं थी लेकिन सुनील, सुनील उसकी आँखों में शुरू से ही खटकने लगा था.

पहले पहल खूबसूरत और चुलबुले सुनील को देखकर रंजन को कोई तकलीफ नहीं हुई थी.किसी से नफरत करना रंजन के स्वभाव का हिस्सा नहीं था.लेकिन माला का सुनील की तारीफ कर खिल उठना,उसकी बाते करते रहना रंजन को अब बुरा लगने लगा था.उन दोनों की शादी की रस्मों में शुरू से लेकर आखिर तक सुनील की मौजूदगी और फिर माला की विदाई के समय उसका उदास चेहरा वह देख चूका था.उसका दिल कर रहा था  सुनील को खरी खोटी सुना दे.उसका जब जी चाहे अपने घर में आना, फ़ोन करना बंद करवा दे.लेकिन समाज में एक सभ्य इंसान के अपने रूप को वह बिगाड़ भी नहीं सकता था.वह रात रंजन की करवटों में गुजर गई जबकि माला एक घंटे बाद आकर गहरी नींद में सो चुकी थी.

अगले दिन रंजन बहुत सवरे 'मीटिंग है' कहकर घर से जल्दी में निकल गया.माला ने उससे नाश्ता करने के लिए आग्रह किया लेकिन उसने अनसुना कर दिया.उसे सुनील की और ज्यादा चर्चा सुनने में कोई दिलचस्पी न थी.माला उसे कई बार बता चुकी थी कि वह सुनील के जन्मदिन की पार्टी की तैयारी करने दोपहर को उसके घर चली जायगी.साथ में गिफ्ट में क्या दिया जाए, इसकी लम्बी लिस्ट सुना चुकी थी जिसमें सुनील की पसंद का उसने पूरा ध्यान रखा था.रंजन के लिए जले पर इतना नमक काफी था.माला ने उसे भी ऑफिस से सीधा सुनील के घर पहुंचने को कहा लेकिन उसने कोई जबाव न दिया.रंजन मुँह फुलाए घर से गया है- माला ने गौर किया. लेकिन रंजन के धीर-गंभीर व्यवहार की आदी माला ने इसे आम बात समझ नजरअंदाज कर दिया.

रंजन उस दिन ऑफिस में अपने काम पर ज़रा भी ध्यान नहीं दे पाया.माला और सुनील हंस-खिलखिला रहे होंगे,एक दूसरे को बीती बातें याद करा रहे होंगे,यह सोचकर रंजन का कलेजा जला जा रहा था.उसने बिना वजह चपरासी को बुरा-भला कहा और अपनी सेक्रेटरी को खूब डांटा.यहां तक कि शाम को माला ने जब रंजन को सुनील की जन्मदिन की पार्टी में आने को कहा तो उसने काम का बहाना बनाकर फ़ोन काट दिया.

"सर, दस बज गए."चपरासी ने देर होते देख सहमी आवाज़ में कहा तो अपनी ही दुनिया में गुम रंजन को जैसे होश आ गया.सारा स्टाफ कब का चला गया था, केवल रंजन और चपरासी ही ऑफिस में बाकि रह गए थे.भारी कदमों से अपना बैग उठाए रंजन बाहर निकल अपनी कार में सवार हो गया.लेकिन घर जाने का उसका मन नहीं था और सुनील की पार्टी में जाकर माला और सुनील को साथ साथ देखने की कल्पना से उसका ब्लडप्रेशर और बढ़ जा रहा था.उसने अपनी कार मरीन ड्राइव की ओर मोड़ दी.समुद्र के शोर में रंजन को एक सुकून सा महसूस हुआ.उसनेआंखे बंद कर ली और कुछ सोचने लगा कि एक शरारती मुस्कुराहट उसके सूखे होंठों पर थिरक आई. उसने अपनी आंखे खोली और कार में जाकर सवार हो गया.फिर मोबाइल निकलकर फेसबुक पेज खोल लिया.

"अरे! तुम कब लौटे?पार्टी में क्यों नहीं आए?सुनील कितना याद कर रहा था तुम्हें।मैं तुम से ही बात कर रही हूँ."सुबह उठते ही माला ने सोफे में धंसे रंजन से कहा लेकिन रंजन ने 'हूँ' 'हां'के आलावा कुछ जबाव न दिया.माला को रंजन का यूँ फाईलों की जगह स्मार्टफोन में डूबे रहना बहुत ही अजीब लगा.सबसे अजीब माला को रंजन के होंठों पर चिपकी मंद मंद मुस्कुराहट लगी.रंजन को इस तरह मुस्कुराते उसने काफी दिनों बाद देखा था.उसने पीछे से झांका तो पाया रंजन फेसबुक खोले बैठा था.माला की नज़र पड़ते ही उसने फौरन लॉगआउट कर दिया.

"तुम और फेसबुक में."माला ने पूछा.

"हां.शिवानी को मैंने कल रात फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा और उसने रात को ही एक्सेप्ट कर लिया."इतना कहकर रंजन स्मार्टफोन रखकर जाने लगा.

"शिवानी कौन?"

"मैंने तुम्हें शिवानी के बारे में नहीं बताया क्या?ओह! सॉरी.शिवानी मेरे साथ स्कूल में पढ़ती थी.बहुत ही सुंदर थी.कल अचानक ही उसकी याद आ गई.सर्च किया और वह मिल भी गई."इतना कहकर रंजन गुसलखाने में घुस गया.माला उसके लहराते कदमों को देख कर अवाक् थी और थोड़ी देर बाद जब रंजन रोमेंटिक गाना गुनगुनता हुआ बाहर निकला तो माला की आंखे और भी बड़ी हो गई.रंजन को गाना भी गाना आता है यह माला को नहीं पता था.शिवानी से दोस्ती होते ही रुखा रंजन रोमांटिक हो गया यह सोचकर माला चीड़ गई.उसपर ऑफिस के लिए निकलने  से पहले नाश्ते की टेबल पर रंजन ने माला को शिवानी के बारे में बहुत कुछ बताया.शिवानी तलाकशुदा है, उसकी एक बेटी है जिसके लिए वह दोबारा शादी करना चाहती है, इसी शहर में बेटी के साथ अकेली रहती है.सारा कॉलेज यही समझता था कि शिवानी रंजन से शादी करेगी.लेकिन शिवानी के माता पिता अपनी लड़की की शादी किसी मामूली परिवार में नहीं देना चाहते थे इसीलिए मजबूरन शिवानी को उनकी पसंद के लड़के से शादी करनी पड़ी.लेकिन शिवानी का दिल अपने पति से न मिला और वह दोनों अलग हो गए.

शिवानी के बारे में जानकर माला बेचैन हो गई.उसने कई कई बार शिवानी का फेसबुक पेज टटोला तो उसमे किसी अनजान दोस्त के प्रति उसने अपने प्यार का इजहार किया था.साथ ही जल्द उससे शादी करने की बात भी कही थी.उदासी से भरे फ़िल्मी गाने भी उस दोस्त को समर्पित किए थे.तस्वीर से शिवानी इतनी सुंदर लग रही थी कि माला को हीन भावना ने घेर लिया.वह लाख कोशिशों के बावजूद भी ऐसी सुंदर नहीं लग सकती। कही रंजन शिवानी के प्रेम में पड़कर मुझे छोड़ न दे यह शंका उसके मन में घर कर गई थी.उसपर उसने शिवानी को जो फ्रेंड रिक्वेस्ट फेसबुक में भेजा उसे शिवानी ने नहीं स्वीकारा.

रंजन के व्यवहार में भी तब्दीली आ गई.माला जब भी उसे फ़ोन करती या तो वह उठता ही नहीं इस फिर उठाकर जरूरी काम की बात कहकर काट देता.यहां तक कि वह घर भी देरी से आने लगा और माला के पूछने पर मीटिंग थी कहता.रविवार और छुट्टी के दिन भी अक्सर सुबह घर से निकल पड़ता और देर रात लौटता.शिवानी से उसकी बस जरुरत भर की बातें होती.शिवानी पति की बेरुखी से टूट सी गई.मुझसे क्या गलती हो गई वह सोचने लगी.वह रंजन के प्यार को वापस पाने के लिए तड़पने लगी.यहां तक कि उसने कई बार रंजन से इस विषय पर बात करनी चाही लेकिन रंजन की अपने प्रति उदासीनता देख चुप रह गई.

"क्या बात है? परेशान लग रही हो."इस दौरान जब सुनील एक रविवार माला रंजन से मिलने आया तो उसे उदास देखकर पूछा.मगर माला ने सच नहीं बताया.वह अपने पति की निंदा करना नहीं चाहती थी.लेकिन सुनील मानने वाला नहीं था.उसने जोर देकर पूछा तो माला ने रंजन और शिवानी के बारे में सब कुछ बता दिया.सुनते ही सुनील दंग रह गया.उसे रंजन से यह उम्मीद नहीं थी. रंजन तो लड़कियों से बात करने से भी कतराता था फिर वह दोस्ती करेगा वह भी तलाकशुदा एक बेटी की माँ से यह सुनील को हजम न हुआ.उसने माला से पूछा कि रंजन इस वक़्त कहाँ है?

"ऑफिस गए है.कह रहे थे जरुरी मीटिंग है."माला ने जबाव दिया.

"चल.आज दूध का दूध और पानी का पानी वहीं करते है."इतना कहकर सुनील माला के साथ रंजन के ऑफिस पहुंचा लेकिन वहा रंजन क्या कोई भी नहीं था.ऑफिस में ताला लटक रहा था.यह देख सुनील ने माला से कहा कि वह रंजन से फ़ोन पर उसका पता पूछे। लेकिन रंजन ने कहा कि वह ऑफिस में है.यह सुन माला फूट फूटकर रोने लगी.माला को रोते देख सुनील ने उसे चुप कराया और फेसबुक में रंजन के प्रोफाइल से शिवानी का पता ढूंढ़ने की कोशिश की.लेकिन कोई सफलता न मिली.शिवानी ने अपना प्रोफाइल प्राइवेट कर दिया था.अब क्या किया जाए? सुनील सोचने लगा फिर उसने माला से रंजन के किसी ऐसे दोस्त के बारे में पूछा जो उसे बचपन से पहचानता हो.

"किशोर भाईसाहब.दोनों बचपन से एक साथ पढ़े है.यही पास में ही रहते है."माला ने बताया.तब सुनील माला के साथ किशोर के घर जा पहुंचा.किशोर माला के एक अनजान आदमी के साथ उनके यहा यूँ आने से हैरान रह गया.तब सुनील ने कहा कि वह माला के भाई जैसा है और माला बहुत दिनों से उनसे नहीं मिली थी इसलिए वह माला को लेकर आया है."लेकिन रंजन नहीं आया?" किशोर ने पूछा तो माला ने कहा कि वह जरुरी मीटिंग के लिए ऑफिस गए है.उसके बाद बातों बातों में माला ने किशोर से पूछा कि वह क्या किसी शिवानी नाम की लड़की को जानते थे जो उनके साथ पढ़ती थी.

"हमारे साथ क्या इस नाम की कोई लड़की तो हमारी ऊपर नीचे की क्लास में भी नहीं पढ़ती थी."

"और कॉलेज में?"

"नहीं शिवानी नाम की लड़की हमारे साथ तो नहीं पढ़ती थी. क्यों ?"

"तो क्या रंजन की कॉलेज में किसी शिवानी से दोस्ती नहीं थी?"

"रंजन की और लड़की से दोस्ती! अरे, भाभी आप ने भी क्या जोक मारा.रंजन लड़किओं को देखकर शर्म से लाल हो जाता था दोस्ती क्या करेगा.हमे तो लगा था वह शादी भी नहीं करेगा.लेकिन आप से शादी कर ली.अच्छा किया.भाभी, आप बहुत लकी हो.रंजन की लाइफ में आप एक ही आई हो और एक ही रहोगी. वैसे क्या किसी ने आप से रंजन के बारे में कुछ कहा है?"किशोर ने पूछा लेकिन माला ने कुछ न कहा और सुनील के साथ लौट गई.

लौटते रास्ते माला ने सुनिल से कहा,"सुनील,प्लीज आज की बात रंजन से कभी मत बताना और हो सके तो अब मुझे घर पर कॉल मत करना. जब करना होगा मैं ही करूंगी और हमारे घर तब तक मत आना जब तक रंजन न बुलाए."

"मगर क्यों?"

"बस जो कह दिया वहीं करना. तुझे मेरी फिक्र है न?" माला ने पूछा.माजरा क्या है न समझते हुए भी सुनील ने हामी भर दी.

उस रात माला ने कई महीनों बाद रंजन की पसंद का खाना बनाया. घर को अच्छे से सजाया और खुद भी अच्छे से सजी. अपनी गलती वह समझ चुकी थी और रंजन के हिस्से का प्यार जो उसने अब तक पूरा उन्हें नहीं दिया था, देना चाहती थी. वह बेसब्री से रंजन के लौटने का इंतज़ार करने लगी. साथ ही मैसेज किया,'कम सून. आई ऍम वेटिंग फॉर यू'.



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