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सुंदरियों
सुंदरियों
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© Phanishwar Nath Renu

Classics

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सुंदरियो-यो-यो 

हो-हो 

अपनी-अपनी छातियों पर 

दुद्धी फूल के झुके डाल लो ! 

नाच रोको नहीं। 

बाहर से आए हुए 

इस परदेशी का जी साफ नहीं। 

इसकी आँखों में कोई 

आँखें न डालना। 

यह ‘पचाई’ नहीं 

बोतल का दारू पीता है। 

सुंदरियो जी खोलकर 

हँसकर मत मोतियों 

की वर्षा करना 

काम-पीड़ित इस भले आदमी को 

विष-भरी हँसी से जलाओ। 

यों, आदमी यह अच्छा है 

नाच देखना 

सीखना चाहता है।

फनीश्वरनाथ रेणु सुन्दरियों उत्कृष्ट रचना

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