डॉ. अरुण कुमार निषाद

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डॉ. अरुण कुमार निषाद

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वैलेंटाइन डे

वैलेंटाइन डे

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जानू' दिव्या ने चहकते हुए कहा : हैप्पी वैलेंटाइन डे डियर'

उधर से मोहित ने चिल्लाते हुए कहा 'वैलेंटाइन वैलेंटाइन' दिमाग खराब कर रखा है। अंग्रेज हो गई हो ना । उसे तो इंतजार था सोनम के फोन का। सोनम को मोहित बहुत चाहता था और मोहित को दिव्या। दिव्या मोहित के लिए सब कुछ न्योछावर करने को तैयार थी। पर मोहित की रग-रग में तो सोनम का नशा छाया हुआ था और सोनम एक मोहित ही नहीं उसके जैसे कई मोहित की माशूका थी। मोहित जैसे न जाने कितने मोहित उसके तलवे चाटते रहते थे और वह किसी को भाव नहीं देती थी। उसका काम था लोगों से अपना काम निकालना और काम होते ही वह दूध की मक्खी की तरह उन्हें छोड़ कर किसी अगले को पकड़ लेती थी। सोनम का फोन नं आने पर मोहित ने खुद फोन लगाया उधर से सोनम ने कहा 'अभी बिजी हूं बाद में करना' । मोहित ने कहा 'कहां बिजी हो डार्लिंग'। सोनम ने झल्लाकर कहा 'कह दिया ना बिजी हूं। दिमाग खराब है क्या तुम्हारा समझ नहीं आता एक बार कहने पर' और उस सोनम ने फोन काट दिया। उधर दिव्या मोहित को लगातार फोन लगाए जा रही थी। मोहित ने झल्लाकर कहा 'जिंदा हूं मर नहीं गया ठीक हूं मैं रखो फोन।' दिव्या का वैलेंटाइन डे रोते-रोते बीत गया। बिना खाए ही सो गई। मोहित ने फिर सोनम को फोन लगाया सोनम ने कहा, लो ब्लॉक कर देती हो तुमको शांत हो जाओ दिमाग खराब हो गया तुम्हारा और उसने मोहित को ब्लाक कर दिया। मोहित ने सोचा चलो अब दिव्या को भी लगाता हूं, मानती तो है मुझे सोनम से ज्यादा। मोहित ने दिव्या को फोन लगाया दिव्या भी गुस्से में थी इसलिए उसने भी फोन स्विच ऑफ कर दिया था। तीनों ने वैलेंटाइन डे अपने अपने ढंग से मनाया।


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