सकराईब
सकराईब
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लिख नहीं सकता था,डिसग्रेफीया था उसको। पर था जिंदादिल,नाटक खेलने का शौक था। बात बेबात में डपट खाता रहता था। नियमों के हिसाब से परीक्षा का परचा सकराईब लिख देता था। नाट्य विद्यालय के सलाना जलसे में "सक्षम हाथ" उसके द्वारा "लिखित" नाटक को प्रथम पुरस्कार मिला था। शायद परमात्मा ही उसका भी सकराईब था।
