STORYMIRROR

Samir Gwalia

Others

3  

Samir Gwalia

Others

रास्तें

रास्तें

1 min
295

आग अंदर की अब जमने लगी है

मेरी लकीरें अब मुझसे कुछ कहने लगी है

चलते हुए चौराहे पे आ खड़ा मैं

चारो तरफ कोहरे से राहें धुंधली पड़ी हैं


अब एक राह ही चुननी पड़ेगी

शायद मैं अभी तैयार ना था

अब उलझन है कि किस रह को जाऊं

हर रास्ता धुंधला पड़ा है

और ना ही कोई आस पास खड़ा है

जिससे पुंछू, की ये रास्ता जाता कहां है


एक रास्ते की सड़कें पत्थरों की बनी है

ताज्जुब है कि उसपे कलियां खिली हैं

एक रास्ता हीरों से बना है

मगर वो बोहोत चुभता है

एक रास्ता रास्ता नहीं, कोई दरिया है

इसमें कूद जाऊं! मगर निकलने का ना कोई जरिया है

किस राह पर जाऊं अजीब समस्या है

कहीं तेज़ी है मगर काबू नहीं

कहीं कीमत है मगर सुकून नहीं

कहीं सुकून है मगर कीमत नहीं

किस राह पर जाऊँ, कुछ मालूम नहीं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi story from Samir Gwalia