प्यार की परिभाषा....
प्यार की परिभाषा....
प्यार !!! विश्वास और प्यार का दूसरा नाम प्यार है. हर कोई कहता है कि प्रेम पवित्रता का सार है, प्रेम सृष्टि की शुरुआत है। प्रेम ही जीवन है, प्रेम ही विश्वास है। प्रेम सत्य है. प्रेम अंततः दो आत्माओं का निस्वार्थ प्रेम है। और प्रेम एक पापरहित, पवित्र, अनमोल रिश्ता है। इतिहास की प्रेम की कालजयी किताब में अब प्रेम की महानता के कई पन्ने हैं। किसी को एक अंधे व्यक्ति की तरह पूरे दिल और आत्मा से प्यार करनाऔर इस प्रेम को अपना समझकर उसका उपहास करना और इसे प्रेम करने के लिए अपने प्राणों को जलाकर अपने हृदय को कष्ट देना निश्चय ही मूर्खता और पागलपन का लक्षण है। क्योंकि सच्चा प्यार वहीं है जहां दो आत्माएं मिलती हैं। और प्यार की एक खूबसूरत दुनिया बनाता है, जहां मौन, शांति, विश्वास और सच्चाई का माहौल होता है। जैसा कि कहा जाता है, प्यार ईश्वर का उपहार है, इसलिए यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि प्यार कब और कहाँ अचानक अपने आप में बदल जाता है। लेकिन आज की दुनिया में प्यार असली हैनहीं कर सकता बल्कि झूठ की आड़ में प्यार के झूठे रिश्ते बनाये जाते हैं l
यहां हर कोई काम से लगभग पागल है। ऐसा लग रहा था मानो किसी खूबसूरत कुंवारी युवती का चेहरा एक बार किसी इंसान की लालची नजरों में कैद हो गया हो। फिर लक्ष्य शुरू होता है. और उन्होंने कहा, "जग्गा मेरा है और सीए मेरा है।" मानो उससे मिलना और उसकी जवानी की ताजगी का आनंद लेना ही उसके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य था। जो असल में प्यार नहीं बल्कि प्यार के नाम पर बहुत बड़ा कलंक है। प्यार ही चाहत है, आज का एऐसा प्रेम भविष्य की मुट्ठी भर राख मात्र है। कौन आज के एआई प्रेम में आंसुओं में डूब रहा है और कौन असहनीय क्रोध की आग में जल रहा है। यहां लड़ाई में कौन जीतेगा और कौन फंसेगा l
यहाँ कौन हँस रहा है और कौन उस विरह-प्रेम में रो रहा है। यह कल्पना से परे है कि कहानी कितनी अधूरी है, कब्र कितनी खुली है, एआई के प्यार में दिल कितना खाली है। और उस प्यार में जिंदगी का रंग एक दाग है. उस प्यार को पाने के लिए, एक दीवह आग जलाता है, और दूसरा दीपक बन कर जल जाता है। किसी के लिए प्यार जिंदगी है, किसी के लिए दर्द है, किसी के लिए प्यार जुनून है तो किसी के लिए असहनीय दर्द है । कौन प्यार की चाहत में हंसता है और कौन प्यार के आंसुओं के सैलाब में भीगता है। कौन सपनों में सोता है और कौन प्यार के अतीत की याद में रोता है। वास्तव में, ईए आज के सच्चे प्यार की परिभाषा है। कहने का तात्पर्य यह है कि प्रेम एक शब्द है, ढाई अक्षर का, जो धरती से भी बड़ा, आकाश से भी व्यापक और ज्वाला से भी अधिक निर्मल, शीतल है।गंगा से भी पवित्र और फूलों से भी कोमल। आज की मायावी दुनिया में प्यार को प्यार कौन परिभाषित करता है? कुछ लोग प्यार को झूठ कहते हैं और उसे अपने पैरों तले रौंदते हैं, जबकि कुछ लोग प्यार को जिंदगी समझते हैं और दिल के मंदिर में उसकी पूजा करते हैं। अगर जिंदगी में प्यार ही प्यार है तो फिर ये धोखा क्यों? मैं कहना चाहता हूं कि क्यों और कब तक? प्यार या तो खुशी की लहरें चलाता है, या दुःख, दर्द और अलगाव की बाढ़ के साथ सरल हृदय में एक बड़ा तूफान पैदा करता है।
जिंदगी में अगर प्यार खुशी है तो दुख पैदा होत है क्यों ? तो बदनसीब के दिल में गम का समंदर है। प्रेम कभी खिलौना नहीं है, कभी कल्पना नहीं है, फिर भी प्रेम जीवित है और जीवित रहेगा, प्रेम अनंत और शाश्वत है। सच कहूँ तो मैं प्यार की परिभाषा जाने बिना ही पागलों की तरह प्यार की परिभाषा समझा रहा हूँ। अगर मैं गलत हूं तो मुझे माफ कर देना. पाप की दुनिया में, प्यार का बढ़ना और गिरना तय है धोखेबाज एआई प्रतिरूपण के जाल में है प्यार प्यार है पूर्ण...........
