पाटन एक परिदृश्य
पाटन एक परिदृश्य
भारत के राजस्थान राज्य के दौसा जिले की तहसील सिकराय में स्थित एक छोटा सा गांव पाटन है। जहां का मैं निवासी हूं।जो कि चारों ओर से अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह तकरीबन 600 घरों की आबादी वाला गांव है।
यहां की पावन भूमि वसंत के समय ऐसे मनोरम हो जाती है जैसे मानो स्वर्ग के देवता भी यहां पर उतर कर निवास करने लगे हो।
मेरा इस पावन भूमि के साथ बचपन से ही एक अटूट सा रिश्ता (बंधन ) रहा है। यह मेरे लिए अत्यंत अद्भुत, देवतुल्य यथा अपने आप में स्वर्ग से भी बढ़कर है।सावन के मौसम में यहां अरावली पर्वत पर व खेतों में चारों ओर हरियाली छा जाती है।सभी जानवर, पशु पक्षी तोता,मैना, कोयल आदि सभी प्रसन्न होकर खुशी में चहचहा रहे होते है।जैसा कि पाटन मेरी जन्म भूमि है और यहां पर मेरे बचपन के दिन बीते हैं।
यह भूमि मेरी रग रग में बसती है। इस भूमि की प्रमुख खासियत यह है कि इस पर कितनी भी गंदगी फैलाओ हो, मां प्रकृति की यह भूमि स्वैच्छिक खुद ही साफ़ हो जाती है।इसकी सीमा से आस पास चार गांव भी जुड़े हुए हैं जिनमें गीजगढ़, घुमणा ,बुजौट, जयसिंहपुरा हैयह गांव गीजगढ़ कस्बे से दक्षिण की और करीब 4 किलोमीटर दूर है।
यहां पर अरावली पर्वत श्रंखला इस गांव से बिल्कुल सटी हुई है जो की गीजगढ़ से बुजौट, घूमना होते हुए घडी गेरोटा गांव के समीप खत्म होती है।अरावली पर्वत की समुद्र तल से ऊंचाई करीब 300 मीटर की ऊंचाई पर है।
मैं मेरा बचपन का अधिकतर समय इस प्रकृति के मध्य ही रहा है ।बचपन में प्रकृति के इन वृक्षों की छांव के नीचे मैं खेला करता था। जो कि हमें निस्वार्थ भाव से फल देने के साथ छांव और हरियाली भी देते है।
एक अद्भुत मनोरम पावन धरा है ये भूमि।
