Dr Gokul Bahadur Kshatriya

Children Stories


4.2  

Dr Gokul Bahadur Kshatriya

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नेपोटिज्म

नेपोटिज्म

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बात उन दिनों की है जब हम अहमदाबाद से तबादला होकर सूरत आए थे। हमारे पड़ोस में एक परिवार था, जिसमें मां के साथ निहायत जहीन, चेहरे पर हमेशा मुस्कान बिखेरने वाली दो प्यारी बेटियां भी रहती थी। दोनों बच्चों के बीच करीब-करीब 10 साल का फर्क था। दोनों को ही उनके मां-बाप ने बड़े नाज़ से पाला था । उसमें भी छोटी वाली छोटी वाली लड़की जिसका नाम पीयू था उसके नाज नखरे पूरा परिवार उठाता था। उसके माता-पिता ने हाथ उठाना तो दूर कभी डांटा भी नहीं था।

अचानक एक दिन पीयू अजीब सी हरकत करने लगी। रोना हंसना, अचानक सोते हुए पलटना, फिर चिल्लाना, स्कूल जाना पर बीच में ही घर आने के लिए उसकी मम्मी से कहना जो स्कूल में काम करती 

थी। माता-पिता ने यह हालत देखकर उसे पहले कंपनी के अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। डॉ.कुमारी रमाराव ने उनकी जांच की, जहां उन्हें कुछ भी नहीं मिला। पर अस्पताल से घर आकर पीयू ने अपनी वही हरकत जारी रखी । माता पिता बैचेन, व्यग्र एवं चिंता के कारण कई दिनों से सो नहीं पा रहे थे। अचानक इस लड़की को हुआ क्या हो गया है ? 

यही भाव उनके मन चौबीस घंटे से तैर रहे थे। इसी बात को लेकर लगातार सोचे ही जा रहे थे। पीयू की मम्मी आंखों में से गंगा की तरह अश्रुधारा रुकने का नाम नहीं ले रही हैं,और उसके पापा से पूछे जा रही है," मेरी बेटी को क्या हो गया है ? मेरी बेटी को किसकी नजर लग गई है ?" पिता के भी बुरे हाल हैं।

पर वे अपने जज्बात को रोककर रखे हैं। फैसला हुआ सूरत के सबसे बड़े चाइल्ड स्पेशलिस्ट को दिखाया जाए। वहां जाकर भी, सारे टेस्ट कराने के बावजूद 

परिणाम ढाक के तीन पात ही आया। माता-पिता की 

 बेचैनी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी। 

एक दिन पीयू की मां ने उसके पिता से कहा,"कहीं किसी बुरी आत्मा का साया तो नहीं?" आदमी मरता तो क्या नहीं करता। भूत प्रेत भगाने वाले झाड़ने वाले को भी दिखा दिया गया। ताबिज बांध दिया, राख की भूभूति दी, बोतल में पानी भी दिया, पर उसके हालात कोई बदलाव नहीं आया । अंत में रिश्ते के फूफा के कहने पर मुंबई के सबसे बड़े न्यूरोलॉजिस्ट को भी दिखाया गया। वहां पर भी सारे रिपोर्ट सामान्य थे। डॉक्टर ने एक ही बात कही," इस बच्ची को कोई बीमारी नहीं है। जो भी बीमारी है वह आपके घर में, पड़ोस में, दोस्तों के बीच, स्कूल में, इसके दिमाग में है।

 घर पर वापस आने पर पीयू मां ने बड़े प्यार से पूछा, "बेटा ,हमने तेरे सारे रिपोर्ट करवा लिए हैं, तुम्हें कोई बीमारी नहीं है। कृपा मुझे तो यह बताओ कि किसी मैडम ने तुम्हें जोर से डांटा था? " बहुत समझाने पर, किसी का डर ना रखने पर, एवं आज के बाद कोई भी उसे स्कूल में उसे डांटेगा नहीं, विश्वास दिलाने पर जवाब में पीयू ने धीमी आवाज में रोते-रोते कहा," मुझे विनीता मैडम ने कहा था कि तेरे मुंह में डंडा घुसा दूंगी।" उसकी मां ने उसे गले से लगाया । दिलासा दिया कि अब से तुझे कोई स्कूल में डांटेगा नहीं । मैं तुम्हारी प्रधानाचार्य से मिलकर आऊंगी , और वह किसी को बताएंगी नहीं कि मैं उनसे मिलकर गई हूं ।"

पीयू ने कहा," मम्मी किसी से कहना मत।" फिर गले से लिपट गई। मां के गले से आकर आज उसका सारा मानसिक दर्द काफूर था।

उसकी मां को एक बीते हुए दिनों की याद ताजा हो गई। उसकी मां को ख्याल आया कि विनीता मैडम ने विरोधी शिक्षकों के साथ मिलकर यह कारनामा किया 

था। यह वहीं शिक्षक हैं, जो नये मेधावी, कुशार्ग, अपने काम से काम रखने वाले, किसी के झुंड में शामिल ना होने वाले, उनकी बात ना मानने वाले शिक्षकों के साथ अप्रत्यक्ष रूप से वे लोग शॉप्ट टारगेट करते हैं। तब से वह डरी हुई थीं, और स्कूल जाना चाहती नहीं थी। उसके दिलो-दिमाग में मैडम की दहशत बैठ गई थी।अतः उनकी एक मित्र से पीयू की मां ने यह कहलवा दिया कि वे सबूत के साथ विद्यालय प्रबंधक समिति के पास जा रहे हैं। यह बात जब मैडम के पास पहुंची, तो वह दौड़ते-दौड़ते नौकरी बचाने के घर आ धमकी। उसकी मां से माफी मांगी, और कहा,''भविष्य में ऐसी कोई गलती नहीं होगी। " मां सोचने लगीकि कुछ बच्चे डराने धमकाने से अंदर ही अंदर घुटने लगते हैं , डर के मारे कुछ बताते नहीं है, और भय,डर,कौफ का इसका शिकार हो जाते हैं। यदि मां बाप अपने बच्चे की बाल मनोविज्ञान को समझ नहीं पाते हैं। कई बार देर होने पर बच्चे हाथ से निकल जाते हैं, और फिर जिंदगी भर का रोना हो जाता है। वह सोच रही थी कि क्या इनसाइडर-आउटसाइडर नेपोटिज्म का मुद्दा केवल फिल्मी दुनिया के अलावा क्या हर जगह नहीं ?


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