my dear son prateek Kartik naruka
my dear son prateek Kartik naruka
तुम्हें जिन्दगी के हर मोड़ पर नया सीखने को मिलेगा ,।आज का जो तुम्हारा दौर है वो डिजिटल युग है तुम ऐसे युग में जन्मे हो जिसे हम डिजिटल युग कहते है ,
इस संचार की डिजिटल दुनिया में तुम्हें सिर्फ और सिर्फ दिमाग से व्यापार करना है ।ये वो समय नहीं जब लोग खेती में मेहनत करता था ,अब तुम सोच रहे होंगे की खेती क्या है ?? तो में तुम्हें बता दूं की खेती वो है जिसे तुमने देखा भी नहीं ना शायद देख पाओगए ।।
किसान की हमारे देश में कोई फिक्र नहीं है ना सरकार को ना जनता को ,,, जब की अन्नदाता ही सर्वपारी है
खैर छोड़ो में तुम्हें समाज और राजनीति बाते क्यों बात रहा हूँ ,,,,,बात उस समय की है जब हम अपने स्कूल जाते थे सन 2000 की बात है मुझे अभी भी याद है जब 2001 आया तो मुझे यकीन नहीं हुआ की 2001 कब आया और समय गुजर गया ,,वो बचपन में पहाड़ पर पूरी दुपहरी बेर की झाड़ी से बेर चुगाना ।।
और पेड़ो की टहनीयों से लटक 2 कर खेल खेलना और हमारा सबसे पसन्दीदा खेल सतोलिया और ,,ताड़ मार की हूल,, ये खेल कपड़े की गेंद से खेला जाता है ।उस समय में कपड़े की ही गेंद होती थी ,,जिस किसी की भी बनियान या सर्ट फट जाती थी तो हम उसकी गेंद बना कर extre रख लेते थे ,,
और सबसे विचलित बात जिस जगह हम ताड़ मार की हूल खेलते थे उस खाली जगह के पास एक हमारा कुआँ था ।जो की आज भी ,पहले उसमें बहुत पानी होता था जब भी हम खेल खेलना शुरु करते ,रोज उस कुएं में बॉल गिर जाती फिर उन बॉलों को एक साथ ही निकलते 5 या उससे अधिक हो जाती थी ,,,हा हा,,
वो भी एक समय था ना नौकरी की टेशन ना घर की आज वो सब समय के साथ कही लुप्त हो चुकी है बेटा ,,,
हमारे गाँव से 7 km या उससे अधिक दूरी पर स्कूल था जहाँ हम पढ़ने जाते थे ,,बेटा उस समय हम खाखी पेंट वो भी आधा पहन कर जाते थे ।।बहुत दूर पैदल सबसे पहले मेरी पढ़ाई गाँव की स्कूल उसके बाद जटवाड़ा और उकसी गाँव के बीच में स्कूल थी ,भावना पब्लिक स्कूल ,,जैसा स्कूल का नाम है ,वहां का माहौल उसके विपरीत था ,,,भावना नाम की कोई बात नहीं थी रहम की भीख मागने पर भी नही मिलती थी ।।वहाँ के हैड इंचार्ज जिनका नाम mrs, भगवती प्रसाद मीना,,
तीनो बात बहुत कॉमन है हम में ,,मेरा नाम और स्कूल का नाम ,और संचालक का नाम भी ,,B वॉर्ड से शुरू होता था ,,,बेटा जी आज के समय 2018 में स्कूल टीचर किसी बच्चों को पीटना तो दूर उससे चिल्ला कर बात नहीं कर सकता है ,,,बहुत कुछ बदल गया तुम्हारे समय में
बात उस समय की है जब हमारा स्कूल में एक महीना खत्म हो चुका था ।।भगवती जी रोज सुबह सुबह 30,35 kg गीली आकड़े की लकड़ी पहले ही स्कूल में रख वा लेते थे ,,साइकिलों और सिर पर रख कर हम लाते थे ,,स्कूल से थोड़ी दूर एक श्मशान था उसमें बहुत मात्रा में देसी आकड़े होते थे ।
फिर उसी गीली गीली लकड़ियों से हमारी ,,काली घोड़े पर लिटा कर धुलाई होती थी ,,,,,एक काले कलर की लोहे की बेंच जिसे काले घोड़े की पदवी दे रखी थी,,,,
पैर ऊपर करके इतनी पिटाई होती थी की रातों में भी सोते समय हम जग जाते थे ,,हा हा सबसे मजे की बात ,,,कुलदीप तुम्हारे चाचा तो रात में इतने ड़रते थे की रातों में दो से दिन बार खाट से उठ उठ कर चिल्लाते थे ,,,,,मास्टर जी छोड़ दो ,कल कर लूँगा 2
यार इतना ख़ौफ़ था भगवती मास्टर जी का की उनके नाम से बच्चे डरते थे ,,,चाहे वो दूसरी क्लास में पिटाई करते हो उसका असर पूरी स्कूल पर पड़ जाता ,,,चाहे क्लास में किसी भी टीचर का परेड हो पिटाई करने के लिए वही मास्टर जी आते थे ,,
जैसे कोई टीचर बच्चे को पिट रहा हो ,अगर वहां से भगवती जी गुजर रहे हो तो ,,समझो उस की पिटाई डबल ,काले घोड़े पर बैठा कर होती थी,,,
इतनी सॉलिड मार थी उनकी ,,आज भी याद है मेरे ही नहीं हर उस बच्चे के जो उस स्कूल से अपनी पढ़ाई कर के गया है ।।अगर कभी time मिले तो पूछना अपने चाचा जी और ताऊ से की भगवती ,,और भावना स्कूल क्या थी ,,,,
लेकिन बेटा तुम बहुत खुश नसीब हो जो तुम ऐसे माहौल में जहाँ दुःख डर दर्द नहीं ,,तुम्हें टीचर ज्यादा नहीं पीटते ।।butt एक वात है वो ये की आज की जो तुम्हारी जनरेशन उसे समय नहीं अपने लिए ,,सुबह जल्दी स्कूल और फिर ट्यूशन और फिर घर ,,घर पर भी ट्यूशन होम वर्क स्कूल वर्क ।।फिर थोड़ा tv देखा और सो ,जाना ।।।
Goood night sons,,,,, close time 22:14 pm day friday
अगले दिन,
Date 16/11/18 place ,nidar village
जिन्दगी के अच्छे मुकाम पर पहुँचने के लिए बहुत हार्डवर्क करना होगा तुम्हें ।और हाँ एक बात जिन्दगी के हर पल ,हर दिन ,को हमेशा ऐसे जीना जैसे आखरी है।
तुम्हारी जिन्दगी में ऐसा भी वो कभी आये जब तुम्हें एक दिन नहीं दस दिन या उससे ज्यादा दिन भूखा रहना पड़े ।या फिर कहूं की वो दिन ना भी आये ,
अभी तुम्हारा बचपन है ,यही वो अवस्था है जब तुम्हें कोई चिंता नहीं है ।खाना ,पीना ,और सोना लेकिन स्कूल जाते समय थोड़ा गुस्सा जरूर करते हो ,जो की हर बच्चा करता ।तुम ही अकेले नहीं ऐसा करते और हर माँ बाप अपने बच्चों को इसी तरह डॉट देते है ,
लेकिन कुछ प्रेम से ,कुछ गुस्से से अपने बच्चों को डॉटते लेकिन मैं हमेशा से तुम्हें प्रेम से ही डॉटता आया हूँ और आगे भी ।क्यों की मैं जनता हूँ सही गलत ,और आने वाले समय में तुम शायद मेरी बाते ना सुनो मैं तुम्हें कहूं और तुम ना कर दो ,,,
या फिर तुम मुझे समझ भी जाओगे ,
,,,,,,,,तुम्हारा पापा
