मैं नदी हूँ
मैं नदी हूँ
दोस्तों, आप ने मुझे तस्वीरों में और वीडियो में तो देखा ही होगा। कई लोगों ने मुझे प्रत्यक्ष भी देखा होगा और मुझ से मिले भी होंगे। और शायद मेरे बारे में जानने के लिए आप उत्सुक भी होंगे। तो चलिए आपको अपने बारे में कुछ बताती हूँ ।
जब बरसात के बादल पहाड़ों से जाकर मिलें, तब मेरा जन्म झरने के रूप में हुआ। मेरे जन्म स्थल को आप उद्गम स्थान के नाम से भी जानते हो। पहाड़ों से नीचे गिरते गिरते जब मैं पठार प्रदेश तक पहुँची, तब तक मैंने नदी का रुप धारण कर लिया। जैसे तैसे मैंने अपने आप बहना सिखा, तब तक मेरे रास्ते में बाँध आ गया। पता नहीं पर वह बांध मुझे मर्यादा में क्यों बांधने लगा। उस बांध की मर्यादा को मैं चुपचाप ही सहती रही। जब बांध के दरवाज़े खुले, तब मैं बेधड़क वहाँ से बहनी लगी। बहते बहते अपने साथ मिट्टी, क्षार, अवशेष इत्यादि को बहाती गई, और खेतों में खेतों खलिहानों को भी समृद्ध करती गई। क्षारता को अंदर रख कर उपरी सतह में मैं मिठास ही देती रही।
और फिर अंत में, आगे जा कर, मैं सागर से मिल कर उस में ही समा गई। ऐसा कर के, मैंने अपना अस्तित्व ख़त्म कर के अपनेआप को ही खो दिया ।
आप ने मुझ में और एक स्त्री में काफी समानताएँ देखी होंगी।
