लाल रंग की काँच की चूड़ियाँ
लाल रंग की काँच की चूड़ियाँ
अलमारी के एक कोने में लाल रंग की काँच की चूड़ियाँ रखी थीं।
सालों से किसी ने उन्हें नहीं पहना था।
एक दिन छोटी-सी बेटी ने उन्हें उठाकर पूछा,
"मम्मा, ये इतनी सुंदर चूड़ियाँ आपने क्यों नहीं पहनी?"
माँ मुस्कुरा दी।
उसने चूड़ियों को हाथ में लिया, धीरे से सहलाया और बोली,
"बेटा, ज़िम्मेदारियाँ कभी-कभी औरत के हाथों से चूड़ियों की खनक छीन लेती हैं।"
बेटी ने बिना कुछ कहे एक-एक करके सारी चूड़ियाँ माँ के हाथों में पहना दीं।
कमरे में फिर से वही मीठी खनक गूँज उठी।
माँ की आँखों से दो आँसू बह निकले।
बेटी मासूमियत से बोली,
"मम्मा, आपकी मुस्कान इन चूड़ियों से भी ज़्यादा सुंदर है। इन्हें अब कभी मत उतारना।"
उस दिन माँ को एहसास हुआ कि कुछ खुशियाँ खरीदी नहीं जातीं...
वे अपने ही बच्चों के छोटे-छोटे प्यार भरे हाथों से लौट आती हैं।
सीख:
ज़िंदगी की भागदौड़ में अपनी खुशियों को मत भूलिए। क्योंकि जो माँ मुस्कुराती है, वही पूरे घर को मुस्कुराना सिखाती है।
– अनु मेहता
✍️ Anu Mehta's Diary 🌸
