STORYMIRROR

Pathik Tank

Others

1  

Pathik Tank

Others

ख्याल

ख्याल

1 min
364

हाँ टूट चुका हूँ। हालातों की मार से या फ़िर असहनीय धैर्य से। प्यार का पैगाम जिस तेज़ी से चला था कहीं थम गया है। चुटकी भर उम्मीद के सहारे दिन को काट रहा हूँ। लेकिन जीने का मकसद अब भी बाकी है। व्यक्तिगत ज़िन्दगी तबाही की ओर चल पड़ी है पर सार्वजनिक जीवन में बहुत काम बाकी है। 

भावनाओं के अकाल में कोई प्यार से बात भी कर ले तो दिन सुहाना लगता है। इस भीड़ भाड़ वाली नगरी मुम्बई में तन्हाई घर कर गई है। 


पर उम्मीद की धीमी किरणों से ढलती इस शाम के साथ एक विश्वास है कि कल की सुबह सुनहरी खुशबुओं से सजी होगी, कल जज़्बातों की कद्र होगी और इसी उम्मीद की थपकी में थका हुआ शरीर गहरी नींद लेता है और चंचल मन अब भी कुछ बिन सुलझे सवालों की तलाश में सपनों की महफिलों में भटका रहता है।


Rate this content
Log in

More hindi story from Pathik Tank