कहानी टापू देश की
कहानी टापू देश की
दूर,टापू देश पर फिर एक सुबह हुई। ये तेज धूप,तंबुओं में सोए बहुसंख्यकों को रास नहीं आएगी। एक बड़ा वर्ग,अपने घरों से कम पे निकल चुका है।औरते मटका लेकर पानी को रवाना हो चुकी है।दूर कुछ दूर पर ,कुछ समय के लिए पानी आता है।आमतौर पर ये गंदा ही होता है।
जिम्मेदारिया और संघर्ष यहां किसी को बुढ़ापा नहीं देखने देते।उनकी बूढी आंखे यह देख भी न पाती।
गलियों दूर तक पोस्टर की चादरों में ढकी है।कई झोपड़ियों पर राजनैतिक पार्टियों के झंडे लग रखे है।
झुग्गियों की ये घाटी बच्चों के रोने की आवाजों से गूंज पड़ी है।वे भूख से बिलख रहे है।कमरों में नीचे बिछाने के लिए चादर तक नहीं है।
गलियों में कुछ बच्चे ऊपर आकाश की और देखते है। एक प्राइवेट जेट उत्तर की ओर जा रहा है।ये विनीत साहब का है।वे यहां के सबसे बड़े उद्योगपति है।अक्सर पार्टी के लिए सुबह को रवाना होते है।आते आते देर शाम हो जाती है।
प्लेन के अंदर एक एयरहोस्टेस उन्हें फोन लाकर देती है।मंत्री जी का कॉल है।विनीत साहब बधाई हो,पश्चिमी सेक्टर के पहाड़ की माइनिंग के लिए परमिशन मिल गया। विनीत साहब के चेहरे पे मुस्कान के साथ साथ आश्चर्य की रेखाएं थी।तेज आवाज में बोले,पर वो एरिया तो प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट के अंदर आता था न। मंत्री जी हंस कर बोले,अरे आप हमेशा टेंशन में क्यों रहते है। पार्लियामेंट में नया एक्ट पास कर दिया है।अब बस आप काम शुरू कराइए।पर इससे वो क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा,और जनता का क्या?
मंत्री जी फिर हंस कर बोले,आप जनता की चिंता न कीजिए वे तो हर रोज मरते है।और हमे कौन सा वहां रहना है बस पहाड़ी खुदवाएंगे और पैसे बांट लेंगे।और सुनिए विनीत बाबू लन्दन में एक बड़ा प्लॉट देखा है।सोच रहा हु रिटायरमेंट के बाद वहीं शिफ्ट हो जाऊ।
वैसे जो झुग्गियों के डेवलपमेंट का टेंडर आपको दिया था,उसका क्या हुआ?
विनीत साहब ने आश्चर्य भरी आवाज में कहा ,पर आप ही ने तो कहा था कि काम शुरू करना और फिर रोक देना।कोई जर्नलिस्ट पहुंचा तो खरीद लेंगे नहीं तो गायब करा देंगे।
ह, हमे याद है कि हमने क्या कहा था ।आप उस प्रोजेक्ट के आधे रकम से लन्दन वाला प्लॉट ले लीजिए।और जनता की चिंता आप न किया करे,वो तो मंदिर ,मस्जिद , जात पात पे पड़े रहने वाले अंधे है। वो दिन भर पत्थर पूजेंगे और वही देखेंगे जो हम उन्हें दिखाएंगे।(मंत्री जी फोन रखते है)
सूरज अब सिर पे है।घाटी में बच्चों के रोने की आवाज अपने पीक पे है।
दूर बड़ी भीड़ देखी जा सकती है।कुछ लोग चौराहे पर बैठे है।अचानक वहां मार पीट शुरू हो जाती है। मार खाने वाले मंत्री जी की तारीफ कर रहे थे।पीटने वाले लोगों ने विनीत बाबू के समर्थक है।
बगल में धर्मस्थलों के आगे लंबी कतार है।
तमाम लोग हाथों में दूध की मटकियां और मजार पे चढ़ाने को चादर लेकर खड़े है।पूजा शुरू हो चुकी है।
बगल से जाते कुछ लोग दूर झुग्गियों की ओर देखते है।पीछे खड़े एक सज्जन बोल पड़ते है,सब प्रभु की महिमा है,पिछले जन्म के पाप भोग रहे है ये सब।
पूजा संपन्न हो चुकी है।दूर एक गढ़े में दूध,दही जमा हो चुका है।एक दूसरे गढ़े में रेस्तरां और होटल का बचा हुआ खाना पड़ा है।
सूरज ढलने को आया है।घाटी में अब सन्नाटा है और आकाश में गिद्ध मंडरा रहे है।
