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Nancy Sundrani

Children Stories

3.5  

Nancy Sundrani

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जो मन करे

जो मन करे

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कक्षा 10वी की परीक्षा समाप्त हो चुकी थी । और समय आ गया था स्ट्रीम चुनना का । कॉमर्स या फिर कला । दिन रात उच्च माध्यामिक शिक्षालय और स्ट्रीम के बारे में सोचे रही थी । उस समय मैं अपनी नानी के घर पर थी । फिर शाम को नानी से बात करके मन हल्का हो गया । नानी ने एक कहानी सुनाई!

एक लड़का था उसका नाम पीयूष था । पहली से उच्च माध्यामिक शिक्षालय में पहला आता था । फिर उसने अपने पिता की बात मान कर इन्जनिरिंग महाविद्यालय में प्रवेश लिया । पहले वर्ष तो तीसरा आया । फिर दूसर वर्ष पूरक आया । पीयूष धीरे - धीरे डिप्रेशन में जा रहा था । फिर पीयूष ने तीसरे वर्ष में महाविद्यालय छोड़ दिया । उसके वालिदैन बहुत नाराज थे । फिर भी पीयूष ने हार नही मानी और आंतरिक डिजाइन का कोर्स किया और सफल भी हुआ । क्योंकि डिजाइन से पीयूष को खुशी मिलती थी । पीयूष को खुश देख कर उस के वालिदैन भी खुश हो गये । 

फिर नानी ने कहाँ, बेटा करना वो ही जो तुम्हारा मन करे ।


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