एक कहानी ऐसी भी
एक कहानी ऐसी भी
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आज नंदनी से मिले पूरे पाँच वर्ष हो चुके थे। वो कहाँ थी, कैसी थी, कुछ पता नहीं था। बस उसकी यादें मेरे पास थी। हम लोग यहीं के पास वाले लखनऊ कैफे में मिले थे। वो रोज ही दफ्तर से आने के बाद यहां जरूर आती थी और मैं भी शायद उसी से मिलने वहां जाती थी।
