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Satish kushwaha

Others

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Satish kushwaha

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भाई--भाई के झंझट

भाई--भाई के झंझट

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आजकल के जमाने में हर व्यक्ति के पास यह देखने को मिल रहा है इंसानियत नाम की चीज समाप्त होते जा रही है।

परंतु वह व्यक्ति दूसरे के बारे में सही नहीं सोच कर गलत सोचना प्रारंभ कर देते हैं। इसका सीधा साधा उदाहरण यह है कि अपने भाई--भाई में भी एकता देखने को नहीं मिल पा रहा है, परंतु वही भाई किसी दूसरे व्यक्ति को अपना भाई मानना प्रारंभ कर देते हैं। उसे यह पता नहीं होता की वह व्यक्ति ही हमारे भाई--भाई के बीच में झंझट का कारण है, वह व्यक्ति हमारे बीच से जब निकल जाए तब यह झंझट समाप्त हो जाएंगे।


कड़वा है पर सच है..

 


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