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कैसे निस्तार
कब कहां कैसे किससे होंता पता न
अब इस वक़्त भी
को कैसे भी
चार दिन की चाँदनी
मंज़िल
भाई-बहन
बढ़ती जा रही
जलन रिश्तों की
जंगल बिन
मिलकर विचार
प्रेमहिईश्वरहै
यारों
कैसे रिश्ते
बनाता है
आंख मूंद कर कैसे यकीन करें
पहचान का मर्म
मुसाफ़िर
पाना है
पहले बेपनाह
Hindi
कैसे-कैसे
Quotes
मंगलवार: यारों ईश्वर कैसे रिश्ते बनाता है, कभी अपना रूलाया ...
सब मिल करके करो विचार। जंगल बिन कैसे निस्तार।। ...
वाणी का वार ,करता ह्रदय तार-तार। ज़ख्म दिखते नहीं, पर छलनी हो ...
बुधवार: पहले बेपनाह बेशुमार प्यार था, भाई-बहन का रिश्ता अनमो ...
इस दुनिया में हमारी पहचान, आयु न होकर हों हमारे कर्म। कितना ...
हर किसी पर आँख मूंद कर विश्वास करना उचित नहीं है।
बुधवार: हम सब मुसाफ़िर सफ़र करते, मंज़िल को कैसे भी पाना होग ...
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