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यकीं की...

यकीं की मौत। हां, मुझे यक़ीन के मौत का मातम है। और इसकी नौहागरी मैं एक ज़माने से करता आ रहा हूं। मैं मश्रिक से मगरिब और शुमाल से जुनूब को भटकता रहा हूं, मुझे हर सू ऐतमाद कफ़न में लिपटा मिला है। इसलिए मैं सबसे झूठ बोलता फिर रहा हूं और वो भी अख्लाक में।

By Premnath Yadav
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