STORYMIRROR

क्या आप उस...

क्या आप उस ख़्वाब की ताबीर को देख पा रहे हैं, जो कभी इक़बाल ने देखा था। मैं देख रहा हूँ अपनी नंगी आँखों से, उन ख्वाबों को जो अपनी तक़्मील को पहुँचने को हैं। - उरूक़-मुर्दा-ए-मशरिक़ में ख़ून-ए-ज़िंदगी दौड़ा समझ सकते नहीं इस राज़ को सीना ओ फ़ाराबी

By Premnath Yadav
 48


More hindi quote from Premnath Yadav
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments