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उसके शहर के...

उसके शहर के कुछ लोग मुझसे मिलने आए हैं जख्म देकर उन्हीं जख्मों को सिलने आए हैं और मुझे कहते हैं वतन परस्त हो तुम वतन परस्त हो तुम ............, ओ जानते नहीं हम वतन के वास्ते वतन पर मिटने आए हैं। २८.१२.१९ कविराज...

By Santosh Kumar Verma
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