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सुलगती आँच पर...
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सुलगती आँच...
“
सुलगती आँच पर धधकती अधन की बुंदे जब पड़ती थी माँ के हथेलियों पर तो सोचा न था जिन्दगी इतनी टेढ़ी है --कंचन
”
By
Kanchan Prabha
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जिन्दगी
अधन
आँच
हथेली
कंचन प्रभा
दरभंगा
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Kanchan Prabha
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