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समझा जिसे लहू...
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समझा जिसे...
“
समझा जिसे लहू अपने रगों का। देखा ज़हर वो मिला रहा था॥ राजीव उपाध्याय
”
By
Rajeev Upadhyay
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आणिनितीमत्ताजिवनाचेहेत्रीसुत्रअंगिकारूनचालतराहणे.हाचजीवनप्रवासहोय.🌸अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि🌸भंडारा
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