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साँस मे...

“ साँस मे तेरी बेहने के लिए, ये हवाएँ चली होंगी! देख के तेरा चेहरा, पेहली कली खिली होंगी!! यूँही नही उठते ज़नाज़े इतने एक साथ… कुछ तो वज़ह रही होंगी !!! ”

By NIYATI PATHAK
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