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प्रेम की...

प्रेम की डोर से बंध जाता प्रेम का बंधन, इसमें रक्त्त के सम्बन्ध का कोई महत्व नहीं है। आपसी स्नेह से सुगंधित होता है यह चंदन, बिना किसी अपेक्षा के विश्वास होता यहीं है।

By Amit Singhal "Aseemit"
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