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पिघल रही है...
“
पिघल रही है यादों की बर्फ अकेलेपन की तपिश से। कई हिमखंड सैलाब बनकर देखो तेजी से आ गए।
”
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अनिल श्रीवास्तव "अनिल अयान"
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अनिल श्रीवास्तव "अनिल अयान"
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