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फराज़ की...

फराज़ की हदों को आज तू भी पार कर समय की चिट्ठियाँ जो हैं उन्हें तू फाड़कर नयी नयी उड़ान नये कारवान पर निकल जा तू ज़माने को दरकिनार कर

By Chakori Shukla
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